मध्यप्रदेश में अवैध शराब का काला कारोबार बेखौफ!
खातेगांव में थाना प्रभारी की मौत ने खोली शराब माफिया के नेटवर्क की पोल, बिना बिल और स्कैनर से बिक्री के आरोपों की जांच कब?
देवास/भोपाल। मध्यप्रदेश के देवास जिले के खातेगांव में थाना प्रभारी दिलीप पुरी की कथित तौर पर शराब माफिया से जुड़े आयशर वाहन से कुचलकर मौत ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना केवल एक पुलिस अधिकारी की जान जाने का मामला नहीं, बल्कि अवैध शराब के कारोबार, उसकी आपूर्ति और बिक्री के नेटवर्क की पड़ताल की जरूरत भी सामने लाती है।
प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में शराब दुकानों और उनके आसपास कथित तौर पर बिना बिल शराब बिक्री, बिक्री रिकॉर्ड में पारदर्शिता की कमी और स्कैनर से भुगतान के नाम पर अनियमितताओं की शिकायतें उठती रही हैं। इन शिकायतों की स्वतंत्र जांच और आधिकारिक आंकड़ों से पुष्टि जरूरी है।
अप्रैल 2026 में आबकारी विभाग ने शराब दुकानों पर QR कोड अनिवार्य करने की व्यवस्था की थी, ताकि ग्राहक स्कैन कर निर्धारित कीमत देख सकें। वहीं, शराब बिक्री की पारदर्शिता और बिल देने की व्यवस्था को लेकर भी विधानसभा में सवाल उठ चुके हैं। NDTV India +2
### आबकारी विभाग से पांच बड़े सवाल
* क्या प्रदेश की सभी शराब दुकानों पर QR कोड व्यवस्था का पालन हो रहा है?
* क्या प्रत्येक बिक्री का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से दर्ज किया जा रहा है?
* बिना बिल या निर्धारित रिकॉर्ड के बाहर शराब बेचने की शिकायतों पर कितनी कार्रवाई हुई?
* अवैध शराब की सप्लाई करने वाले नेटवर्क तक विभाग कब पहुंचेगा?
* पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
### अब जवाबदेही तय करने का समय
खातेगांव की घटना ने चेतावनी दी है कि अवैध शराब का कारोबार केवल राजस्व का मामला नहीं, बल्कि जनसुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय है। मुख्यमंत्री, गृह विभाग और आबकारी विभाग को प्रदेशव्यापी जांच करानी चाहिए। शराब दुकानों के स्टॉक, खरीद-बिक्री, QR कोड, भुगतान और परिवहन रिकॉर्ड का ऑडिट हो तथा दोषी पाए जाने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
टॉप स्टार न्यूज़ का सवाल — शराब माफिया के आगे कानून कब तक चुनौती झेलता रहेगा?
संपादकीय टिप्पणी: बिना बिल बिक्री और स्कैनर संबंधी अनियमितताओं के आरोपों की जिला-वार जांच आवश्यक है। इन्हें पूरे प्रदेश में प्रमाणित तथ्य मानने से पहले आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने आनी चाहिए।
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