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सोमवार, 25 मई 2026

पूरे प्रदेश में जल संरक्षण का डंका,ओर प्यास से तड़पकर तेंदुआ शावक की मौत, जंगल के नाम पर लाखों खर्च.. फिर भी नहीं मिला पानी!

प्यास से तड़पकर तेंदुआ शावक की मौत!

मोहम्मदगढ़ में वन विभाग की लापरवाही उजागर, जंगल के नाम पर लाखों खर्च.. फिर भी नहीं मिला पानी!

विदिशा 
विदिशा जिले के मोहम्मदगढ़ क्षेत्र में एक दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां एक वर्षीय तेंदुआ शावक की भूख और प्यास से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि रविवार रात तेंदुआ शावक पानी की तलाश में बस्ती तक पहुंच गया था और स्कूल के आसपास भटकता रहा, लेकिन उसे कहीं पानी नहीं मिला। आखिरकार प्यास से तड़पते हुए उसकी मौत हो गई।
घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। वन विभाग की मौजूदगी में चार डॉक्टरों की टीम ने तेंदुआ शावक का पोस्टमार्टम किया। इसके बाद विभागीय अधिकारियों की निगरानी में अंतिम संस्कार भी कराया गया।
बड़ा सवाल…
हर साल वन विभाग को जंगलों में वन्य प्राणियों के लिए पानी की व्यवस्था, टंकियां, जल स्रोत और संरक्षण कार्यों के नाम पर लाखों रुपए मिलते हैं।
फिर आखिर जंगल में पानी क्यों नहीं था?
अगर पानी की समुचित व्यवस्था होती तो एक मासूम वन्य प्राणी की जान बच सकती थी।
ग्रामीणों का आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र के जंगलों में गर्मी के दिनों में पानी के स्रोत सूख जाते हैं। वन विभाग केवल कागजों में व्यवस्थाएं दिखाता है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है। इसी कारण जंगली जानवर आबादी की ओर आने को मजबूर हो रहे हैं।
सवालों के घेरे में वन विभाग
क्या वन विभाग ने समय रहते जल स्रोतों की व्यवस्था की?
लाखों रुपए खर्च होने के बाद भी जंगल प्यासे क्यों हैं?
वन्य प्राणियों की सुरक्षा के दावे आखिर कितने खोखले हैं?
मोहम्मदगढ़ की यह घटना सिर्फ एक तेंदुआ शावक की मौत नहीं, बल्कि जंगलों में बदहाल व्यवस्थाओं और जिम्मेदारों की लापरवाही की दर्दनाक तस्वीर बनकर सामने आई है।

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