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शनिवार, 27 मई 2023

चुनावी रंजिश को लेकर हुये दो पक्षों के विवाद के खूनी संघर्ष के 38 आरोपियों को उम्रकैद

प्रदेश का ऐतिहासिक फ़ैसला..

*बबचिया हत्याकांड के चर्चित मामले में 38 आरोपियों को आजीवन कारावास 17 लोग बरी*


गंजबासौदा
 प्रदेश का शायद यह पहला मामला होगा जिसमे एक साथ इतने लोगों को सजा मिली 
ग्राम  बबचिया में 11 वर्ष पूर्व एक चर्चित मामले में दो मुश्लिम गुट के आपसी झगड़े में 5 मृत व्यक्तियो सहित 38 आरोपियों को जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार शर्मा ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। तो वही दूसरे पक्ष के सभी 2 मृत व्यक्तियों सहित 17 लोगो को बरी कर दिया गया।

*चुनावी रंजिश को लेकर हुआ विवाद खूनी संघर्ष में बदला*
चुनावी रंजिश को लेकर वर्ष 2011 को शमशाबाद थाने के ग्राम बबचिया में एक ही समुदाय के दो पक्षो में खूनी संघर्ष हुआ।जिसमें अधा दर्जन लोगो की मौत हो गई थी।जिसमे पुलिस ने दोनों पक्षो पर धारा 148,149,302 सहित अनेक धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच,में लिया था।जिसमे एक पक्ष में 53 आरोपी बनाए गए थे।तो वही दूर पक्ष के 17 लोगो को आरोपित किया गया था।
शनिवार 12 वर्ष बाद आये फैसले में एक पक्ष के. इमरान उर्फ ईम्मा,बन्ने खान, नन्ने खान,शकील खां ,रिजवान खान,बाबू खान, आमिर खान,तारिक सहित,38 लोगो को उम्र कैद की सजा सुनाई गई।जिसमे से पांच आरोपियो
शाहिद खा पुत्र आशिक खां मेवाती,
इरफान उर्फ लंगडा पुत्र काले खां,
काले खां पुत्र इम्तियाज खां ,
गुफरान खां पुत्र काले खां,फैय्याज खां पुत्र मुसाब खां की मृत्यु प्रकरण न्यायालय में विचाराण के दौरान ही हो गई थी।
न्यायालय ने शनिवार को न्यायालय में पेश किए गए सभी 33 आरोपितों को हत्या और बलबा का दोषी पाते हुए सजा सुनाई। वही 3 नाबालिगों आरोपियों का प्रकरण में वाल न्यायलय में विचाराधीन है।और 12 आरोपी पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं।

*चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुनाया ऐतिहासिक फैसला
शनिवार को 12 वर्ष बाद कि ट्रायल के बाद सुनाए जाने वाले फैसले को लेकर फैसले को लेकर न्यायालय परिसर में सुरक्षा के चाकचौबन्ध सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।जिसमे न्यायालय के बाहर सड़क को वन वे करके ट्रैफिक एक साइड से कर दिया गया था।एवं न्यायालय के मुख्य द्वार पर पुलिस वाहन एवं जेलवाहनो को दोनों ओर से लगा दिया गया। एसडीओपी मनोज मिश्रा,सिटी टी आई मुकाती,देहात थाना प्रभारी गिरीश दुवे ,यातायात प्रभारी रीतेश बाघेला ने सुरक्षा व्यवस्थाओ को अपने हाथ मे ले रखा था,इधर पुलिस ने वैरिकेटिंग भी न्यायालय के चारो तरफ से कर रखी थी।पांच थानों का पुलिस वल,सशस्त्र सैनिक की टुकड़ियां भी इस दौरान तटस्थ थी।वही न्यायालय परिसर में आने वाले लोगो की पहचान के बाद ही अंदर जाने की परमीशन थी।
पुलिस ने किसी भी प्रकार की स्थिति से निपटने के पुख्ता इंतजाम कर रखे थे। इधर 6 दर्जन लोगों की तकदीर का फैसला होने जा रहा था।इसके चलते शहर के साथ ग्राम बबचिया एवं आसपास के ग्रामो के मुश्लिम समुदाय एवं अन्य लोग भी न्यायालय के आसपास एकत्रित हो गए थे।जिन्हें वहां से हटाने और बार बार लगने वाले जाम को हटाने पुलिस को काफी मसक्त करना पड़ी।

*डोल ओर बाजो के साथ मैदान निश्चित करके हुआ था झगड़ा*

सामान्य झगड़ा जब अहम की लड़ाई बन जाये तो लोग एक दूसरे के खून के प्यासे हो जाते हैं।ऐसे में लोग रिश्ते नाते,धर्म जाती,अपना पराया सब भूल जाते हैं।ऐसा ही घटना क्रम 2 फरवरी सन 2011 को ग्राम बबचिया में देखने मे आया। ग्रामीणों ओर जनचर्चा अनुसार ग्राम में चुनावी रंजिश के चलते बाद विवाद देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गया। लोग बताते है कि दोनों पक्षो ने रोज रोज की लड़ाई से एक बार फैसला करने का मन बनाया।जिसमे दोनों पक्षो को समझाइश देने के बजाए। इस खूनी संघर्ष को होने तक कोई हस्तक्षेप नही किया।और दोनों पक्ष निश्चित किये स्थान पर पहुच गए।जहां एक पक्ष जो बाहुबल में ज्यादा था उसके द्वारा ढोल बाजे का इंतजाम भी किया ।लोगो का यहां तक कहना है कि जिस स्थान का चयन हुआ था।वहाँ साफ सफाई तक कराई गई थी।साउथ फिल्मों की तरह दोनों पक्ष 3 फरवरी की सुबह 10 बजे के करीब ग्राम बबचिया में रईश खान के मकान के पास पहुच गए।जहां बंदूक,तलवार,फरसा, लाठियों के साथ साहिल खान मुन्ने खान बगैरह एवं मुराद खान ,रिजबान खान बगैरह पहुच गए।और देखते ही देखते अहम का झगड़ा खूनी संघर्ष में बदल गया।जिसमें शाहिर खान,इरफान ,काले खान,गुफरान ,फैय्याज खान सहित कुल 6 लोगो की मौत हो गई थी।पुलिस ने दोनों पक्षो पर प्रकरण दर्ज कर आरोपियों को जेल भेज दिया था।जिसमे से एक पक्ष के 33 लोगो को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। वही इस इस पक्ष के 5 लोगो की मौत ट्रायल के दौरान हो गई इस तरह 38 लोगो को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। वही दूसरा पक्ष जिसके 15 लोगो को न्यायालय से राहत मिली है वही 2 लोगो की मौत हो गई इस तरह इस पक्ष के 17 लोगो को बचाब पक्षो के वकीलों के द्वारा तथ्य पूर्ण साक्ष्यों ओर दलीलों के आधार पर बरी कर दिया गया है। दोषमुक्त हुए लोगो ने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए धन्यवाद किया।
शनिवार को न्यायालय परिसर सुबह से ही काफी हलचल बनी हुई थी ओर शहर भर के लोगो के लिए न्यायालय परिसर चर्चा का केंद्र बिंदु बना हुआ था। जिसमे प्रथम जिला न्यायालय एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार शर्मा के द्वारा मध्य प्रदेश में पहली बार हुए न्यायालय के सुनाए गए ऐतिहासिक फैसले में 38 लोगो को आजीवन करावास की सजा एवं प्रत्येक आरोपी पर साढ़े बारह हजार रुपये का अर्थ दंड का फैसला सुनाया। वही न्यायालय परिसर में दर्जनों की संख्या में खड़े अभिभाषक एवं सैकड़ो की संख्या में मौजूद पुलिस कर्मी, न्यायालय परिसर के चारो तरफ हजारों की संख्या में ग्रामीण क्षेत्रो से आये लोगो को न्यायालय से न्यायधीश के अगले पक्ष को सुनाए जाने वाले फैसले का बेसब्री से इंतजार था।लोग अलग अलग कयास लगा रहे थे।कि एक पक्ष के सभी लोगो को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।तो दूसरे पक्ष के लिए भी कुछ ऐसा ही फैसला सुनाया जाने वाला है। कोर्टरूम के अंदर से एक फैसले के करीब 3 घँटे बाद दूसरा फैसला आया। जिस पर हर व्यक्ति के लिए चौकने वाला था। तो वही बुद्धिजीवी वर्ग और न्याय को जानने वाले नागरिको को विल्कुल भी आश्चर्य वाला फैसला नही माना गया। न्यायधीश शर्मा ने दूसरे पक्ष के सभी 17 लोगो को दोषमुक्त कर दिया। जिसमे दो लोग की म्रत्यु हो गई है। इसके पीछे अभिभाषकों के द्वारा दी गई तर्क पूर्ण दलीलो ओर साक्ष्यों के आधार रहा।वही 12 सालो से न्याय के इंतजार कर मुराद खां, रिजवान खां, बाबू खां रहमान खां अंसार,इरसाद,छोटा संटू, बड़ा संटू,जालम खां सुल्तान खां, मुसतीक,हुसैन,असपाक,कमर अली ने बताया कि हमे न्यायालय पर पूरा भरोसा था। कि हमारे साथ हुई ज्यादती का हमे इंसाफ जरूर न्यायालय द्वारा किया जाएगा। न्यायालय ने हमारे पक्ष को सुना,हमारे अभिभाषकों ने जो साक्ष्य प्रस्तुत किये ,उनसे हमे इंसाफ मिला। न्यायालय की ओर से शासकीय अधिवक्ता एडवोकेट नरेंद्र व्यास ने न्ययालय के समक्ष पूर्ण साक्ष्य एवं दलील प्रस्तुत की जिसने 38 आरोपियों को उम्र कैद की सजा मिलना। मप्र के न्यायालयीन फैसलों में ऐतिहासिक माना जा रहा है।

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