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शुक्रवार, 20 मार्च 2026

किसानों पर कुदरत का कहर: अन्नदाता' पर गिरी ओलों की आफत, सुनहरी फसलें मिट्टी में मिलीं

कुदरत का कहर: कुरवाई के 'अन्नदाता' पर गिरी ओलों की आफत, सुनहरी फसलें मिट्टी में मिलीं

मंडी बामोरा क्षेत्र के एक दर्जन गांवों में बिछी सफेद चादर; सीहोरा, ककरुआ और पीकलोन में भारी तबाही

कुरवाई/
शुक्रवार की दोपहर कुरवाई तहसील के किसानों के लिए किसी काली त्रासदी से कम नहीं रही। क्षेत्र के मंडी बामोरा बेल्ट में अचानक बदले मौसम के मिजाज ने देखते ही देखते तबाही का मंजर पैदा कर दिया। तेज गर्जना और कड़कती बिजली के बीच हुई भारी बारिश और भीषण ओलावृष्टि ने क्षेत्र के लगभग एक दर्जन गांवों में पकी-पकाई फसलों को पूरी तरह जमींदोज कर दिया है।
आसमान से बरसी 'सफेद आफत'

शुक्रवार दोपहर करीब 2:00 बजे आसमान में काले बादलों का डेरा जमा और तेज हवाओं के साथ ओले गिरना शुरू हुए। सीहोरा, ककरुआ, लेटनी, पीकलोन, गुदावल और गंभीरिया सहित आसपास के गांवों में ओलों का आकार इतना बड़ा था कि कुछ ही मिनटों में खेतों से लेकर सड़कों तक बर्फ की सफेद चादर बिछ गई। प्रकृति के इस उग्र रूप ने किसानों के साल भर के अरमानों को चकनाचूर कर दिया है।
खेतों में बिछ गई 'सोने' जैसी फसल
वर्तमान में खेतों में गेहूं, चना और सरसों की फसलें पूरी तरह पककर तैयार थीं। कई जगह कटाई का काम शुरू हो चुका था, लेकिन इस बेमौसम मार ने ओलों की चोट से गेहूं की बालियां टूटकर जमीन पर गिर गईं। चने और सरसों का नुकसान: चने के झाड़ उखड़ गए और सरसों की फलियां झड़ जाने से दाना पूरी तरह बर्बाद हो गया। खड़ी फसलें आड़ी गिरने और पानी में डूबने से अब उनके काले पड़ने का डर सता रहा है।

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