पड़ोस छोड़ क्षेत्र में अवैध क्लीनिकों पर कार्रवाई करने निकले श्रीमान!
त्योंदा रोड के दो और सिरनोटा का एक क्लीनिक सील, एफआईआर के लिए पत्र भेजा; सवाल—पड़ोस में कितने क्लीनिक वैध, सूची सार्वजनिक क्यों नहीं?
गंजबासौदा/त्योंदा। बिना वैध दस्तावेजों के संचालित किए जा रहे क्लीनिकों के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। कलेक्टर अंशुल गुप्ता के निर्देश पर सोमवार 5 अक्टूबर को राजस्व एवं स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए तीन क्लीनिक सील किए।
त्योंदा रोड, गंजबासौदा में एसडीएम के निर्देश पर अस्पताल अधीक्षक डॉ. रविंद्र चिड़ार ने पटवारी एवं पुलिस बल के साथ सुमित मालाकार क्लीनिक एवं तुषार कांति दास क्लीनिक का निरीक्षण किया। टीम ने क्लीनिक संचालन एवं चिकित्सा सेवाओं से संबंधित आवश्यक दस्तावेजों की जांच की। कार्रवाई के बाद दोनों क्लीनिकों को सील कर दिया गया।
इसी तरह ग्राम सिरनोटा में उमेश यादव द्वारा संचालित क्लीनिक पर भी संयुक्त टीम पहुंची। यहां उपचार के लिए पांच मरीज मौके पर मिले। टीम द्वारा क्लीनिक संचालन एवं चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने से संबंधित वैध दस्तावेज मांगे गए, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार संचालक कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद पंचनामा तैयार कर क्लीनिक सील किया गया तथा आवश्यक वैधानिक कार्रवाई के लिए थाना प्रभारी त्योंदा को एफआईआर दर्ज करने हेतु पत्र भेजा गया।
कार्रवाई के दौरान तहसीलदार त्योंदा आनंद जैन, खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. नीलेश गुर्जर, चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रमेन्द्र तिवारी एवं फार्मासिस्ट राहुल साहू मौजूद रहे।
कार्रवाई पर सवाल भी
प्रशासन की कार्रवाई के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि गंजबासौदा एवं आसपास के क्षेत्र में संचालित सभी निजी क्लीनिकों की वैधता की जांच कब और किस आधार पर होगी? यदि प्रशासन के पास क्षेत्र में पंजीकृत एवं वैध रूप से संचालित क्लीनिकों की सूची है तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता, ताकि आमजन भी यह जान सकें कि कौन-सा क्लीनिक नियमों के तहत संचालित है।
शासकीय डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर भी स्थिति स्पष्ट हो
इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या शासकीय सेवा में पदस्थ डॉक्टरों द्वारा निजी क्लीनिक संचालित करने को लेकर कोई प्रतिबंध अथवा निर्धारित नियम लागू हैं? यदि नियम हैं तो उनकी भी समान रूप से जांच होनी चाहिए और प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
यह किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप नहीं, बल्कि समान कार्रवाई और पारदर्शी जांच की मांग से जुड़ा सवाल है। यदि अवैध क्लीनिकों के खिलाफ अभियान चल रहा है तो क्षेत्र के सभी क्लीनिकों की जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि कितने संस्थान नियमों के अनुरूप संचालित हो रहे हैं और कितनों के दस्तावेजों में कमी है।
प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि बिना वैध दस्तावेजों के चिकित्सा सेवाएं संचालित करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। अब देखना यह है कि यह अभियान केवल चिन्हित कुछ क्लीनिकों तक सीमित रहता है या पूरे क्षेत्र में संचालित चिकित्सा संस्थानों की समान रूप से जांच की जाती है।
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