गंजबासौदा,
वरिष्ठ रचना कार शिखर चंद्र शिखर ने पालिथिन सर्वनाशी सत्यानाशी कहा कवि कमलेश सोनी ने कहा की " पेड-पखेरू
पर्वत-नदियाँ झरनों से गिरता शीतल पानी
पर्यावरण पर निर्भर दुनिया वात सभी की जानी मानी"
वरिष्ठरचना कार रिषभ विंदास ने कहा की "वायू-जल भूमि को मत कर गंदा
नहीं तो वना वनाया है मौत का फन्दा"
गीतकार ओपी प्रजा पति का कथन था की "अपने आंगन पैड लगाओ"
शायर फहीम वासोदवी अपनी दिलकश आवाज में कहा "इस तरह मुल्क को वचाना है
रास्ता दुनिया को दिखाना है
ऊसर-वंजर भूमी को भाई
हरि-भरीं मिल-जुल के वनाना है
आंगन के जिस आम को अम्मा ने
वेटे की तरह पाला पोषा वेटों के बंटवारे में उस आम के कट जाने के दर्द को वयां करते हुये चन्द्र कुमार तारन संपादक सॄजन परिदृश्य ने कहा "वेटों ने जाना कब
वहु ने माना कब बंटवारे में
आंगन ही वंट गया
पक्षियों का रैन वसेरा मिट गया
अम्मा का कलेजा फट गया"1
इस अवसर पर भरत सराठे भारतीय पंकज नामदेव वैद्य राज निहाल सिंह पंथीजी कवि महेन्द्र भार्गव हरि नारान हरि कमलेश वंसल जयकूमार शीतल ओपी प्रजा पति डा महेंद्र प्रताप मेहता
शायर अजीम भाई शिव चरण विश्वकर्मा सूर्य प्रकाश श्रीवास्तव
ने भी जलवायु परिवर्तन प्रदूषण विश्व विनाशक युद्ध की विभीषिका पर अपने विचार साझा किये
चन्द्र कुमार तारन संपादक सॄजन परिदृश्य
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