गंजबासौदा, हरीश भावसार
मध्यप्रदेश में किसानों के साथ यह कैसा मजाक 50,50 किलोमीटर से फसल लेकर आते हैं हजारों का डीजल जलता है इसके बाद भी फसल न बिके तो क्या हाल होगा क्रषि मंत्री जी के संसदीय क्षेत्र में यह हाल है
किसान सम्मेलन हो रहै लेकिन अमल नहीं ऐसा ही मामला ग्राम ककरावदा के किसान राजू रघुवंशी अपनी चने की फसल लेकर बंजारी माता मंदिर खरीदी केंद्र पहुंचे, लेकिन “मानक स्तर” का हवाला देकर फसल रिजेक्ट कर दी गई।
फिर भी अगर चने में एक भी तेवड़ा दाना मिल गया, तो पूरी फसल खारिज!
सोचिए, क्या जीरो प्रतिशत तेवड़ा की शर्त जमीन पर संभव है ??
चना खेत में उगता है, एसी कमरों में नहीं !!
एक तरफ मंडी में यही तेवड़ा खुलेआम बोली में बिक रहा है,
दूसरी तरफ खरीदी केंद्र पर 1–2% तेवड़ा मिलते ही उसे “अयोग्य” घोषित कर दिया जाता है।
👉 खरीदी केंद्रों पर 4 दिन में सिर्फ 100 क्विंटल खरीदी( एक केंद्र पर )
करीब 12 ट्रॉलियां किसान वापस घर लेकर लौटे।
राजू जी जैसे कई किसान 4–5 दिन से केंद्र पर ही डटे है, एक-एक दाना छांटने को मजबूर है।
ये व्यवस्था नहीं, किसानों के साथ सीधा अन्याय है।
सरकार नियम बना रही है या कम खरीदी करने के बहाने ढूंढ रही है ??
क्या किसान ऐसे ही अपमान सहता रहेगा ??
किसान मेहनत करे और सिस्टम उसे रिजेक्ट कर दे, आखिर ये कब तक चलेगा ??
#NarendraModi सरकार से सवाल है क्या इसी तरह किसानों की आय दोगुनी होगी ??
कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan जी, क्या ये है आपकी किसान हितैषी नीति ??
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री Dr Mohan Yadav सरकार को तुरंत इस पर ध्यान देना चाहिए..
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