विकास की असली तस्वीर: मुक्तिधाम जाने से पहले घर से ले जाना पड़ता है टीन शेड..!
बारिश में पन्नी और अस्थायी टीन शेड के नीचे होता है अंतिम संस्कार, शहर से महज 5 किमी दूर कराखेड़ी गांव की दर्दनाक हकीकत
विदिशा
जिले में बड़े बड़े नेताओं कै बड़े बड़े भाषण नाम बड़े और दर्शन छोटे ,,कभी पेरिस बनवाने की बात करते हैं तो कभी रोजगार नोकरी की नतीजा शून्य,आजादी के करीब आठ दशक बाद भी यदि किसी गांव में अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील व्यवस्था के लिए लोगों को अपने घर से टीन शेड, पन्नी, लकड़ी और कंडे लेकर जाना पड़े, तो यह विकास के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। विदिशा शहर से मात्र पांच किलोमीटर दूर स्थित कराखेड़ी गांव की तस्वीर कुछ ऐसी ही है, जहां दशकों से व्यवस्थित मुक्तिधाम का अभाव ग्रामीणों की मजबूरी बना हुआ है।
शनिवार को गांव के एक बुजुर्ग के निधन के बाद एक बार फिर यह बदहाल व्यवस्था सामने आई। बारिश के बीच अंतिम संस्कार करना था, लेकिन मुक्तिधाम पर न तो स्थायी टीन शेड था और न ही कोई मूलभूत सुविधा। ऐसे में ग्रामीणों ने पहले घर से लाया गया टीन शेड और पन्नी लगाकर अस्थायी छाया तैयार की, फिर उसी के नीचे अंतिम संस्कार किया।
ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। गांव में जब भी किसी की मृत्यु होती है, हर बार यही प्रक्रिया दोहरानी पड़ती है। अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक सामग्री घर से ले जाना गांव की मजबूरी बन चुकी है।
सरकारी जमीन है, लेकिन पहुंचने का रास्ता नहीं
ग्रामीणों के अनुसार मुक्तिधाम के लिए सरकारी जमीन तो वर्षों पहले चिन्हित कर दी गई थी, लेकिन वहां तक पहुंचने का रास्ता आज तक नहीं बन सका। परिणामस्वरूप ग्रामीण गांव से लगभग एक किलोमीटर दूर निजी जमीन पर अंतिम संस्कार करने को मजबूर हैं। सरकारी भूमि उपलब्ध होने के बावजूद केवल रास्ते के अभाव में उसका उपयोग नहीं हो पा रहा है।
सचिव और पटवारी पर उपेक्षा के आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वर्षों से इस समस्या की जानकारी होने के बावजूद ग्राम सचिव और पटवारी ने समाधान के लिए कोई प्रभावी पहल नहीं की। यदि समय रहते रास्ते की व्यवस्था कर दी जाती, तो ग्रामीणों को निजी भूमि पर अंतिम संस्कार करने जैसी विवशता का सामना नहीं करना पड़ता।
वीडियो वायरल होने पर जागा प्रशासन
बारिश में टीन शेड और पन्नी के नीचे अंतिम संस्कार किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया। अधिकारियों ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों से चर्चा की और मुक्तिधाम की स्थिति का निरीक्षण किया।
बैठक में सरकारी मुक्तिधाम तक पहुंचने के लिए निजी भूमि से रास्ता उपलब्ध कराने पर सहमति बनी। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर जल्द ही रास्ते की व्यवस्था की जाएगी, ताकि सरकारी भूमि पर व्यवस्थित मुक्तिधाम विकसित किया जा सके।
अब समाधान की उम्मीद
ग्रामीणों को उम्मीद है कि वर्षों से चली आ रही यह पीड़ा अब समाप्त होगी और भविष्य में किसी परिवार को अपने प्रियजन के अंतिम संस्कार के लिए घर से टीन शेड और पन्नी ढोने की मजबूरी नहीं झेलनी पड़ेगी।
यह केवल एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास और बुनियादी सुविधाओं के उन दावों पर सवाल है, जिनकी हकीकत कराखेड़ी जैसे गांव आज भी बयां कर रहे हैं।
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